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टाइफाइड (Typhoid) क्या है? टाइफाइड की बीमारी के लक्षण और इसका आयुर्वेदिक इलाज, बचाव एव सावधानियां।

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हम इस ब्लॉग पोस्ट में आपको (टाइफाइड (Typhoid) क्या है?) टाइफाइड की बीमारी के संबध में जानकारी देने का प्रयास करेंगे। टाइफाइड (Typhoid को आमतौर पर मोतीझरा या मियादी बुखार (आंत्र ज्वर) के नाम से जाना जाता है। टायफाइड पूरी दुनिया में बैक्टीरिया के कारण होता है। ये बीमारी दूषित भोजन और पानी के उपयोग के कारण होती है। जब किसी दूषित पानी में साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया मौजूद होता है या फिर कोई व्यक्ति टायफाइड के बैक्‍टीरिया से ग्रस्‍त व्‍यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने के कारण भी टायफाइड हो सकता है। इस बीमारी के बैक्टेरिया दूषित स्थान और सूखे हुए सीवेज में कई सप्ताह तक जीवित रह सकते है।

टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी के मुख्य लक्षण निम्नलिखित होते हैं:

अब हम आपको टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी के मुख्य लक्षणों के संबध में जानकारी देंगे, इन लक्षणों के माध्यम से हम टायफाइड के रोग की पहचान कर समय रहते एक अच्छे चिकित्सक या डॉक्टर से संपर्क कर अपना उचित इलाज करा सकते है। तो आए अब जानते है टायफाइड की बीमारी के लक्षण क्या क्या है:

उच्च तापमान: टाइफाइड में बुखार अचानक उठता है और लम्बे समय तक बना रहता है। आमतौर पर बुखार 102 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर होता है।

• सिरदर्द: टायफाइड के मरीजों को तेज सिरदर्द हो सकता है, जो विशेष रूप से सुबह और शाम को अधिक होता है।

• पेट में दर्द और उलटी: टाइफाइड के मरीजों को पेट में दर्द और उलटी आदि की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

• पेट में सूजन: टाइफाइड के मरीजों के पेट में सूजन और उभार आदि हो सकता है।

ठंड और खांसी: टाइफाइड के  रोगियों को ठंड और खांसी की शिकायत हो सकती हैं।

• खाने की इच्छा नहीं होना: टायफाइड के मरीजों को अक्सर खाने की इच्छा नहीं होती है और वे खाने में ज्यादा रुचि नहीं रखते हैं।

• पेशाब कम आना: टायफाइड की बीमारी में पेशाब में कमी हो जाती है और पेशाब दर्दभरा आता है।

• पेट में दर्द: पेट के ऊपरी भाग में दर्द महसूस हो सकता है जो आमतौर पर नाभि के नीचे वाले हिस्से महसूस होता है।

• लोगों के लोगों का मुंह सुखना: टाइफाइड की बीमारी में मरीज का मुँह सुख जाता है।

• त्वचा पर चकत्ते पड़ना: टाइफाइड के मरीजों को त्वचा चकत्ते जैसे दाग दिख सकते हैं, जिन्हें रोज़ बढ़ते हुए देखा जा सकता है।

• थकान और कमजोरी: टाइफाइड की बीमारी में रोगी को थकान और कमजोरी महसूस होती है और मरीज आलस्य महसूस करता हैं।

• वजन कम होना: टाइफाइड के मरीजों का वजन कम होने लगता है। 

• अपाचन या अपच: कई लोगों को टाइफाइड में अपाचन या अपच जैसी समस्या हो सकती है, जिससे खाना खाने में तकलीफ हो सकती है।

टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार क्या हैं:

अब हम आपको टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी के आयुर्वेदिक उपचार के संबध में जानकारी देंगे, आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से टायफाइड की बीमारी का इलाज किया जा सकता है। टायफाइड का आयुर्वेदिक उपचार निम्नवत है:

• तुलसी: टायफाइड के इलाज में तुलसी की पत्तियों का सेवन करना चाहिए। तुलसी के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो बैक्टीरियल संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं।

• हरड़: हरड़ का सेवन प्रत्येक दिन करने से टायफाइड की बीमारी लाभ मिलता है। हरड़ में विशेष रूप से एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इनफ्लेमट्री गुण होते हैं, जो टायफाइड जैसे संक्रमण के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

• गरम पानी और नमक: टायफाइड के रोगी को गरम पानी में एक छोटी सी मात्रा में नमक मिलाकर पिने से आराम मिलता है।

• सफ़ेद धनिया: सफ़ेद धनिया में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो बैक्टीरियल संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। टायफाइड के उपचार में सफ़ेद धनिया का सेवन करना चाहिए।

• शंखखुदरी (चिक्कुदु) का रस: शंखखुदरी के पत्ते का रस पीने से टायफाइड की बीमारी में राहत मिल सकती है।

• गिलोय (गुडूची): गिलोय का रस या पाउडर पानी के साथ लेने से टायफाइड में सुधार हो सकता है।

• पिप्पली (पिपलीमूल): पिप्पलीमूल का पाउडर औषधि के रूप में लेने से टायफाइड के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

• शतावरी (अस्परागस रैकेमोसस): शतावरी के प्रयोग से शरीर की कमजोरी दूर होती है और टायफाइड के इलाज में मदद मिल सकती है।

• खाने की आदतों का ध्यान रखें: टायफाइड के इलाज में सही खान-पान का महत्वपूर्ण योगदान होता है। संक्रामण से बचने के लिए साफ पानी का उपयोग करें, अधिक पानी पिएं और स्वच्छ और स्वच्छ आहार का सेवन करें।

• मुनक्का, अंजीर और खुवकला के मिश्रण का सेवन: मुनक्का (5), अंजीर (3) और खुवकला (आधा चम्मच) को लेकर एक पत्थर की सिलौटी पर अच्छी तरह से पीसकर  चटनी बना ले। इस चटनी का सेवन करने से टायफाइड की बीमारी ठीक हो जाती है।

• निम्बू पानी: टायफाइड रोगी को निम्बू पानी पिने की सलाह दी जाती है क्योंकि निम्बू पानी में विटामिन सी की मात्रा होती है जो शरीर के रोग प्रतिरोध को मजबूत करता है और संक्रमण का सामना करने में मदद करता है।

• आराम करें: टायफाइड के मरीज को इलाज के दौरान आराम का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस बीमारी में शरीर को पूरी तरह से आराम देने से बीमारी को ठीक किया जा सकता है।

• सही इलाज: टायफाइड के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें और उनके द्वारा बताई गई सलाह द्वारा ही इस बीमारी का उपचार करवाएं।

टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी का बचाव और सावधानियां क्या हैं:

अब हम आपको टाइफाइड (Typhoid) की बीमारी का बचाव और सावधानियां के संबध में जानकारी देंगे, हम टायफाइड की बीमारी से समय रहते बचाव और सावधानियां द्वारा टायफाइड में राहत और बचाव किया जा सकता है। आए जानते है:

• साफ पानी का सेवन: इस बीमारी से बचने के लिए स्वच्छ और साफ पानी का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण है।

• हाइजीनिक खाना: टायफाइड में रोगी को घर का बना स्वच्छ और हल्का भोजन करना चाहिए। बाजार या बाहर के खाने से बचना चाहिए।

• हाइजीनिक बर्तन: रोगी को साफ और हाइजीनिक बर्तन का उपयोग करना चाहिए।

• संक्रमित व्यक्ति से बचाव: टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क से बचें।

• अच्छी आहार आदतें: स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करना टाइफाइड से बचने में मदद करता है। जैसे फल, सब्जियां, अंकुरित अनाज और प्रोटीन से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।

• ताली हुई चीजों का सेवन न करें: समोसे, पकोडे, लड्डू और हलवा, चटकदार और मसाले बनी खाने की वस्तुएं जैसे- अचार, चटनी आदि का सेवन नही करना चाहिए।

• सफ़ाई का ध्यान रखे और सतर्क रहें: सफ़ाई का ध्यान रखना टायफाइड को रोकने में महत्वपूर्ण है। खासतौर पर, स्वच्छ और पानी वाले स्थानों की जांच करें और सुनिश्चित करें कि आसपास का पानी भी साफ़ हो।

• खाने की सावधानियां: ताजा और स्वच्छ भोजन खाएं, और तले हुए या न तले गरमा गरम भोजन से बचें। रसीदार और दबावदार खाने से परहेज करें।

• चटकदार और मसाले बनी खाने की वस्तुएं जैसे- अचार, चटनी आदि का सेवन नही करना चाहिए।

• अधिक स्वादिष्ट सब्जियों जैसे गोभी, शिमला मिर्च, मूली, प्याज और लहसुन आदि का सेवन नही करना चाहिए।

• टाइफ़ाइड की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को तेज गंध युक्त खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।

• वैक्सीनेशन: अब टाइफाइड की बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन भी उपलब्ध है। हम वैक्सीन के माध्यम से हमारी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है और टाइफाइड के संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। वैक्सीनेशन के संबंध में आप अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

• समय पर चिकित्सा: टाइफाइड के लक्षणों का समय पर चिकित्सा कराना बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपको टाइफाइड के लक्षण आते हैं, तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें और उनकी सलाह के अनुसार उपचार करें।

टायफाइड से बचाव के लिए हमको सावधानियां और उपाय अपनाना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि इस संक्रमण को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। यदि आपको टायफाइड के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें और सही उपचार प्राप्त करें।

एसपी सिंह चंद्रमा

एसपी सिंह चंद्रमा

अधिकतर मेरे लेख अपने आरोग्य को सुधारने, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद के अद्भुत फायदों पर आधारित होते हैं। मेरा उद्देश्य सामान्य लोगों को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है और उन्हें शक्तिशाली आयुर्वेदिक उपचार और उपायों से अवगत कराना है। मेरे लेखों में आपको विशेषज्ञ सलाह और नैतिकता के साथ विश्वसनीय जानकारी मिलेगी जो आपके रोगों को दूर करने में मदद करेगी और आपको स्वस्थ और प्रकृति से समृद्ध जीवन जीने में सहायता करेगी। धन्यवाद।

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